New Hindi Kahani 2020 | Gareeb Autowala

Hindi Kahani for Kids:- यह Hindi Kahani एक गरीब ऑटोवाले के ऊपर आधारित हैं|यह Hindi Kahani लॉकडाउन के समय की है|

इस Hindi Kahani में हम एक गरीब के जीवन में होने वाली मुश्किलों को जानेंगे|

इस Hindi Kahani के द्वारा हम बच्चो को यह सीख देना चाहेंगे कि अपने आस पास के असहाय लोगो की हमें मदद करनी चाहिए|

तो आइये शुरू करते हैं अपनी Hindi Kahani-गरीब ऑटोवाला:


गरीब ऑटो वाला

( Hindi Kahani for Kids)

New Hindi Kahani 2020| Gareeb Autowala

यह कहानी एक गरीब ऑटो वाले हसन की है जो इन दिनों लॉकडाउन की वजह से बहुत परेशान था|

लॉक डाउन की वजह से उसकी कमाई लगभग बंद ही हो गई थी|

फिर भी वह मेहनत करके जैसे तैसे अपना घर चलाने की कोशिश कर रहा था|

कुछ महीनों से सारे कामकाज बंद रहने की वजह से उसको घर चलाना बहुत मुश्किल हो गया था|

कुछ महीनों के लॉकडाउन में उसके द्वारा जमा किया हुआ सारा पैसा खत्म हो गया था|

उसके पास एक ऑटो था वह भी किराए का था|

उसका एक दिन का किराया ₹500 था और मकान का किराया भी अलग से|

उसके लिए अपने परिवार को दो वक्त का खाना जुटाना बहुत मुश्किल हो गया|

उसे अपने कुछ दोस्तों और रिश्तेदारों से उधार पैसे भी लेने पड़े|

हसन को यह सब कर्जा भी चुकाना था|

ऐसे में उसको कुछ समझ नहीं आ रहा था कि अब वह घर चलाने के लिए क्या करें?

कुछ दिनों बाद थोड़े समय के लॉकडाउन हटा दिया गया|

फिर हसन ने अपना ऑटो सड़क पर निकाला| यह सोच कर कि अब ज्यादा मेहनत करूंगा और ज्यादा पैसे कमा कर सब का कर्जा चुकाऊंगा|

उसके घर का सारा राशन खत्म हो गया था|

अब उसे किसी भी हालत में घर पैसे लाने थे ऐसा सोचते हुए वह ऑटो लेकर निकल पड़ा|

बेचारा दिनभर सवारी की खोज में ऑटो स्टैंड पर बैठा रहा क्योंकि सड़क पर उतने लोग नहीं थे जितने लॉकडाउन से पहले रहते थे|

चार पांच घंटों के इंतजार के बाद उसे एक सवारी मिली| सवारी के उस आदमी ने हसन को ₹100 दिए|

उसे दिन भर में एक ही सवारी मिली वह भी ₹100 की| महामारी के डर से लोग ऑटो में बैठ नहीं रहे थे| 

हसन सोच रहा था कि जैसे तैसे लॉकडाउन तो खुल गया लेकिन सड़क पर लोगों की सवारी पहले मिलती थी वैसे अब क्यों नहीं मिल रही है? ऐसा कैसे चलेगा?

ऐसे सोचते हुए रात हो जाती है| फिर वह घर की ओर निकल पड़ता है |

उसके ऑटो में पेट्रोल भी खत्म होने वाला था| 

हसन सोच में पड़ गया| अब मैं दिन भर में कमाए हुए ₹100 से अपने बीवी बच्चों के लिए राशन लेकर जाऊँ? या फिर अपने ऑटो का पेट्रोल भरूं ताकि मैं दूसरे दिन सवारी पर जा सकूं?

इसी दुविधा मनोस्थिति में वह ऑटो चला रहा था| तभी उसका ऑटो एक कार से टकरा जाता है और कार को एक मामूली सी खरोच आ जाती है|

तभी उस कार से एक मोटा सा आदमी उतरता है| जो कि बहुत अमीर दिखता है| उसके गले में सोने की चैन रहती है| 

वह हसन को गुस्से से बोलता है,"ओ ऑटोवाले रुक तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरी कार को धक्का देने की? चल पैसे निकाल  मुझे मेरे कार के नुकसान के पूरे ₹5000 चाहिए|"

बेचारा हसन बोलता हैं,"साहब गलती हो गई साहब| मुझे माफ कर दो| मैंने जानबूझ के नही किया| साहब मुझे माफ़ कर दो| साहब मेरे पास तुम्हें देने के लिए इतने पैसे नहीं है| साहब मुझे जाने दो साहब|"

वह आदमी बोलता है,"क्या पैसे नहीं है? तो मेरा इतना बड़ा नुकसान कौन भरेगा तेरा बाप? तू जानता नहीं बेटा तूने किसकी गाड़ी ठोकी है| चल गाड़ी साइड में ले चल| 

हसन बीच सड़क में उस आदमी से माफी मांगता है| फिर भी वो आदमी हसन की एक नहीं सुनता|

उस बेचारे पर दया करने की बजाय उल्टा उसका कॉलर पकड़कर के उसके जेब में से पैसे निकलता है|

उसे सिर्फ उसकी जेब में ₹100 मिलते हैं जो कि हसन ने दिन भर में इतनी मुश्किल से कमाए थे| 

वह आदमी बोला,"सिर्फ 100 रूपए! हट साला भिखारी| मेरी इतनी महँगी गाड़ी का नुकसान कौन भरेगा? रुक तुझे अभी दिखाता हूं मैं क्या चीज हूँ|"

वह आदमी अपनी गाड़ी की डिक्की में से एक रोड निकालकर हसन की ऑटो का कांच फोड़ देता है|

और बोलता है,"अब हुआ न हिसाब बराबर|"

ऐसा बोल कर अपनी गाड़ी में बैठ कर वहां से निकल जाता हैं| उस अमीर आदमी को हसन से पैसे तो नहीं मिले|पर उस गरीब की ऑटो का नुकसान करके पता नहीं कौन सा सुकून मिला?

हसन अपने टूटे हुए ऑटो को लेकर जैसे तैसे वहां से निकल जाता है|

ऑटो की टूटी हुई काँच देखकर सोचता है,"पहले ही इस ऑटो के मालिक को इसका किराया देना बाकी है और अब यह टूटा हुआ कांच|अब इसका नुकसान मैं कहां से भरूं?

सोचा दिनभर ऑटो चला कर चार पैसे कमाऊ तो ढंग से सवारी भी नहीं मिल रही| जो ₹100 मिले थे वह भी तो वह अमीर आदमी लेकर चला गया|

अब मैं क्या करूं? अपने परिवार को क्या खिलाऊ?"

बेचारा यह सोचकर हिम्मत हार देता है और फूट-फूट कर रोने लगता है|

इस लॉकडाउन में इस देश के बहुत लोगों को मानसिक और आर्थिक रूप से बुरी तरह से झंझोड़ कर रख दिया है|

इस बुरे वक्त में हमें एक दूसरे की मजबूरी समझ के एक दूसरे का साथ देना चाहिए|

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