New Hindi Kahani | Buddhimaan Chaiwala | Hindi Kahaniyan 2020

Hindi Kahani For Kids:- यह Hindi Kahani एक चायवाले के जीवन पर आधारित हैं | 


इस Hindi Kahani में हम पढेंगे कि कैसे अपनी बुद्धिमानी और ईमानदारी से उसने अपनी जिंदगी बदली |


इस Hindi Kahani के द्वारा हम यह संदेश भी पहुँचाना चाहते हैं कि कोई भी काम छोटा नही होता | 


अगर आप कोई कार्य मेहनत और समझदारी से करेंगे तो आप अवश्य सफल होंगे |


इस कहानी में हम चायवाले से सीखेंगे की किस प्रकार उसने समझारी से अपनी गरीबी को हराया |

चलिए इस Hindi Kahani:बुद्धिमान चायवाला की शुरुआत करते हैं :

बुद्धिमान चायवाला

(Hindi Kahani For Kids)

New Hindi Kahani | Buddhimaan Chaiwala | Hindi Kahaniyan 2020


होशियारपुर गांव में एक सुरेश चाय वाला अपनी चाय की छोटी सी रेहड़ी लगाता था | 


एक तो वैसे ही चाय बड़ी सस्ती होती है|


ऐसे में कई बार उसके दोस्त मुफ्त में उसके यहाँ चाय पीने पहुँच जाते थे,तो कभी कोई मजबूर भूखा-प्यासा इंसान उससे मदद माँगने पहुँच जाता था |


वो उन्हें चाय पिला देता था | ऐसे में उसे कोई मुनाफा नही होता था | मुनाफा नही होने के कारण वह परेशान रहता था ||


वह पूरे दिन रेहड़ी द्वारा अर्जित कमाई लेके घर पहुँचता हैं | 


वह अपनी पत्नी को पूरे दिन की कमाई देते हुए कहता हैं,"ये लो अर्पिता आज फिर वही पैसे मिले हैं |


इतनी मेहनत करने के बाद भी कभी कोई कमाई नहीं होती और जब कमाई होती है तो कुछ मुफ्तखोर दोस्त आ जाते हैं और कभी-कभी तो कोई भूखा प्यासा आ जाता है |


एक चाय पर ₹1 कमाई होती है और वह भी इनकी वजह से बराबर हो जाते हैं |"


उसकी पत्नी कहती हैं,"कोई बात नहीं जी | भूखे प्यासे को चाय पिला देना तो अच्छी बात है |"


चायवाला कहता हैं,"हां पर जो मुफ्तखोर दोस्त आते हैं वो ?"


उसकी पत्नी कहती हैं,"वह भी उनकी नसीब का खाते हैं |


यही सोच कर खुश हो जाया कीजिए | आइये बैठिए | खाना लगाती हूँ |"


चाय की रेहड़ी एक ऐसी जगह है जहां चाय पीने के बहाने कुछ लोग इकट्ठे होते हैं और अपने दुख दर्द की बातें भी करते हैं |


चाय वाला सुरेश सभी को चाय पिलाते हुए उनके दुख दर्द की बातें सुनता रहता था |


उसके चाय की रेहड़ी पर दो व्यक्ति आपस में बात कर रहे होते हैं |


उनमे से एक व्यक्ति दूसरे से कहता हैं,"क्या बात हैं भोला ? कुछ परेशान से लग रहे हो ?"


दूसरा व्यक्ति कहता हैं,"हाँ यार | बीवी की तबीयत बहुत खराब है और डॉक्टर के पास जाने के लिए पैसे नहीं है |"


पहला व्यक्ति कहता हैं,"मेरा भी पेमेंट नहीं आया है | वरना मैं ही दे देता | सुरेश भाई से पूछ कर देखो |"


दूसरा व्यक्ति चायवाले से कहता हैं,"सुरेश भाई ₹500 दे दोगे ? परसों पगार मिलते ही लौटा दूँगा | मेरी बीवी की तबीयत ख़राब हैं | मैं परसों पक्का दे दूँगा |


चायवाला कहता हैं,"ठीक हैं ये लो |" 


वो उसे ₹500 दे देता हैं |


तीसरे दिन सचमुच में वो आदमी आया और चायवाले को उसके 500 रुपये लौटा दिए |


चायवाले ने पैसे लेकर गल्ले में रखने ही चाहे थे कि तभी एक और आदमी आता हैं |


वह आदमी चायवाले से कहता हैं,"सुरेश भाई , शंकर बता रहा था कि आपने भोला को ₹500 देकर मदद की थी |


मेरी भी 300 रुपये की मदद कर दो  |कल शाम को ही वापस कर दूंगा | बड़ी परेशानी में हूं |"


सचमुच दूसरे ही दिन शाम को वह आदमी आता हैं और चाय वाले को उसके 300 रुपये वापस कर देता है |


चाय वाला उससे रुपए लेकर गल्ले में रख लेता है | चाय वाला उस आदमी को चाय देता हैं |


तभी एक आदमी वहां रोता-सा पहुंच जाता है |


वह आदमी चायवाले से कहता है,"सुरेश भाई, भोला ने मुझे भेजा हैं | प्लीज मुझे हजार रुपये दे दो |


बहुत जरुरत हैं नहीं तो मैं मर जाउँगा | परसों वापस करता हूँ | प्लीज सुरेश भाई |"


चायवाला कहता हैं,"अरे मैंने तो भोला कि यूं ही मदद कर दी थी |


मेरे पास इतने पैसे नहीं होते हैं |"


वह आदमी कहता हैं,"नहीं सुरेश भाई , ऐसा मत कहो | नहीं तो मैं मर जाऊंगा | मैं  परसों ही वापस कर दूंगा | प्लीज सुरेश भाई |"


चायवाला कहता हैं,"ठीक है,ठीक है | रो मत | यह लो |"


चायवाला उस व्यक्ति को हजार रुपये दे देता हैं |


उन्हें इस बात का डर भी लगता है कि ऐसा ना हो कि इतनी बड़ी रकम लेकर वह चंपत हो जाए |


हजार रुपए की रकम सुरेश भाई चायवाले के लिए बड़ी रकम थी | 


मगर परसों वह सचमुच वापस आता है और सुरेश भाई को सौ-सौ के कुछ नोट देता है |


सुरेश भाई नोट गिनते हैं तो देखते हैं कि वह बारह सौ है |


सुरेश चायवाला कहता हैं,"भाई, यह तो बारह सौ है |


आप तो 1000 रुपये ले गए थे  | यह लिजिए 200 रुपये वापस |"


वह आदमी कहता हैं,"नही सुरेश भाई, यह मेरी तरफ से आपके लिए | आपने ऐन वक़्त पर मेरी मदद की |"


सुरेश चायवाला कहता हैं,"नहीं-नहीं | यह मैं नही ले सकता |"


वह आदमी कहता हैं,"ले लो भाई |"


सुरेश चायवाला कहता हैं,"मैं नही ले सकता ये एक्स्ट्रा पैसे |"


वह आदमी कहता हैं,"रख लो सुरेश भाई | फिर जरूरत पड़ी तो आप ही काम आएंगे,फिर ले लेंगे | रख लो सुरेश भाई |"


सुरेश चायवाला कहता हैं,"चलिए आपके यह 200 रुपये इस जेब में रखता हूं | जब जरूरत पड़े ले लीजिएगा |"


उसी दिन सुरेश चायवाला अपने घर पर जलेबी लेकर पहुंचा | बीवी जलेबी देखते ही खुश हो गई |


वह अपने पति से कहती हैं,"मेरी पसंद की जलेबी | चार महीने से इंतजार कर रही थी | लगता है आज मुददल के साथ-साथ कमाई भी हुई हैं |"


सुरेश चायवाला कहता हैं,"कमाई ही नहीं एक्स्ट्रा 200 रुपये आ गए | यह देखो |"


उसकी पत्नी पूछती हैं,"200 रुपये | वो कैसे ?"


सुरेश चायवाले ने कहा,"हमारे एक ग्राहक को हजार रुपए की जरूरत थी |मैंने दे दिए |


उसका काम हो गया तो खुशी में उसने हजार के साथ-साथ 200 रुपये एक्स्ट्रा दे दिए मुझे |"


उस दिन बड़े दिनों बाद सुरेश चायवाले ने अपनी बीवी को इतना खुश देखा था | रात भर इस खुशी में सुरेश चायवाले को नींद नहीं आई | 


वो सोचता रहा,"मेरी चाय की रेहड़ी पर रोज ही ऐसे दुखी लोग आकर अपने पैसे का रोना रोते हैं |


अगर मैं इसी तरह लोगों की मदद करता रहूं और लोग मुझे एक्स्ट्रा पैसे देते रहे | तो मेरे पास एक नए तरह की कमाई का जरिया शुरू हो जाएगा |"


उस दिन से वो ना सिर्फ लोगो को चाय पिलाने पर ध्यान देता था | बल्कि उनकी बातो पर भी बहुत ध्यान देता था |


कुछ लोग उनसे मदद माँगते, तो कुछ को वह खुद ही मदद करने की पेशकश रख देते |


धीरे-धीरे लोगों को पता चलता गया कि सुरेश चायवाला लोगों को पैसे देता है और बदले में कुछ रकम ज्यादा ले लेता है | फिर ज्यादा रकम लेने वाली बात चार्ज में बदल गई |


शुरू शुरू में तो सुरेश चायवाला एक्स्ट्रा मिले पैसे जेब में रख लेता था |


फिर धीरे-धीरे उसकी जेब दोपहर होने तक भर जाती थी | 


उसने उसके लिए एक तिजोरी खरीद ली | फिर तो तिजोरी भी कम पड़ने लगी | 


चाय की छोटी-सी रेहड़ी एक बड़ी-सी दुकान में बदल गई | सुरेश चायवाले का चाय का धंधा तो साइड में ही रह गया |


पैसों के लेन-देन का धंधा जोरों पर चल पड़ा |


अब सुरेश चायवाले की दुकान पर चाय पीने वाले कम और मदद मांगने वाले ज्यादा आने लगे | 


एक दिन एक व्यक्ति सुरेश के दुकान पर आके कहता हैं,"सुरेश भाई .बेटी की शादी है | 1 लाख रुपये चाहिए पर थोड़ा लेट दूंगा |


सुरेश कहता हैं,"दीनदयाल भाई. जब चाहो दे देना | आपकी बेटी हमारी बेटी है | खुशी से शादी करो | यह लो |"


सुरेश चायवाला हर आदमी की मदद करता था, वह एक अच्छे स्वाभाव का व्यक्ति था | 


धीरे-धीरे उसने अपने गांवके साथ साथ आसपास के 4 गांव में भी बहुत सम्मान प्राप्त किया  | 


कुछ दिनों बाद जब गांव के मुखिया का चुनाव हुआ तो सभी ने उसी का नाम मुखिया के तौर पर आगे रख दिया |


उसने बहुत मना किया पर कोई नहीं माना | 


वह सारे जिनके उसने जाने-अनजाने में मदद की थी |


उसे भारी मतों से जीता कर अपना मुखिया बना लाए | 


अपने पति को मुखिया बना देख चायवाले की बीवी बहुत खुश हुई |


उसने अपने पति से पूछा,"ए जी,यह कौन सा जादू कर दिया आपने लोगों पर ? चाय वाले से सीधे मुखिया |


सुरेश ने कहा,"क्या बताऊं अर्पिता .मैं तो एक ही बात जानता हूं |


इंसान कितना भी छोटा काम क्यों न करता हो लेकिन जीवन में उसे सफल होने का एक मौका अवश्य मिलता हैं | 


अगर वह अपनी समझ्दारी और मेहनत का सही प्रयोग करे ,


तो वह जीवन में हर प्रकार की विपदाओ को पार कर सकता है|"


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